संस्कृत-शब्दकोशः

विकाङ्क्षा विकारित

विकार

विकारः [वि+कृ+घञ्]


1. रूप या प्रकृति का परिवर्तन, रूपान्तरण, प्राकृतिक अवस्था से व्यत्यय, तु० विकृति
2. परिवर्तन, अदल–बदल, सुधार–पंच० १।४४
3. बीमारी, रोग, व्याधि विकारं खलु परमार्थतोऽज्ञात्वाऽनारम्भः प्रतीकारस्य–०४,कु०
4. मन या अभिप्राय का बदलना–मूर्छंत्यमी विकाराः प्रायेणैश्वर्यमत्तेषु–श० ५।१९
5. भावना, संवेग–उत्तर० १।३५, ३।२५, ३६
6. विक्षोभ, उत्तेजना, उद्वेग –कि० १७।२३
7. विकृत रूप, आकुंचन (मुखमुद्रा, हावभाव आदि) प्रमथमुखविकारैर्हासयामास गूढ़म्–कु० ७।९५
8. (सांख्य० में) जो पूर्वस्रोत या प्रकृति से विकसित हो ।
समस्त पद
~हेतुः
प्रलोभन, फुसलाना, उद्वेग का कारण–विकारहेतौ सति विक्रियन्ते येषां न चेतांसि त एव धीरा:–कु० १।५९।



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