विक्रिया [वि+कृ+टाप्]
1. परिवर्तन, सुधार, बदलना–श्मश्रुप्रवृद्धिजनिताननविक्रियान्–रघु० १३।७१, १०।१७
2. विक्षोभ, उत्तेजना, उद्वेग, जोश आना अथ तेन निगृह्य विक्रियामभिशप्तः फलमेतदन्वभूत् कु० ४।८१, ३।३४
3. क्रोध, गुस्सा, अप्रसन्नता – साधोः प्रकोपितस्यापि मनो नायाति विक्रियाम् सुभा०, लिंगैमुद: संवृतविक्रियास्ते–रघ० ७।३०
4. उलट, अनिष्ट कू० ६।२९ (विक्रियायै वैकल्योत्पादनाय 'दोष' मल्लि)
5. (मोजे इत्यादि) बुनना, आकुंचन वा (भौंहों की) सिकुडन भ्रूविक्रियायां विरतप्रसंगैः कु० ३।४७
6. आकस्मिक आन्दोलन जैसा कि 'रोमविक्रिया’ में विक्रम १।१२, 'रोमांच होना'
7. अकस्मात् रोगग्रस्तता, बीमारी
8. उल्लंघन, ( उचित कर्तव्य का) बिगाड़ देना, रघु १५।८८ ।
समस्त पद
~उपमा
दण्डी द्वारा वर्णित उपमा का एक भेद दे० काव्य० २।४१ ।
विक्रिया [विकृ+श+टाप्]
1. चोट, आघात, हानि
2. लोप ।
परिशिष्ट