वितत (भू० क० कृ०) [वि+तन्+क्त]
1. फैलाया हुआ, विस्तृत किया हुआ, बिछाया हुआ
2. आयत, विशाल, विस्तीर्ण
3. सम्पन्न, निष्पन्न, कार्यान्वित –विततयज्ञः–श० ७।३४
4. ढका हुआ
5. प्रसृत –दे० वि पूर्वक तन्,
~तम्
कोई भी ऐसा उपकरण जिसमें तार लगे हों – वीणा आदि ।
समस्त पद
~धन्वन्
(वि०) जिसने अपने धनुष को पूरी तरह तान लिया है ।