संस्कृत-शब्दकोशः

विधारण विधित्सा

विधि

विधिः [वि+धा+कि]


1. करना, अनुष्ठान, अभ्यास कृत्य, कर्म – ब्रह्मध्यानाभ्यसनविधिना योगनिद्रां गतस्य –भर्तृ० ३।४१, योगविधि –रघु० ८।२२, लेखाविधि–मा० १।३५
2. प्रणाली, रीति , पद्धति, साधन, ढंग –पंच० ११३७६
3. नियम, समादेश, कोई विधि जो सबसे किसी बात को लाग करती है (यह 'विधि' शब्द नियम और परिसंख्या से भिन्न है) विधिरत्यंतमप्राप्तौ
4. वेद विधि या नियम, अध्यादेश, निषेध, कानून, वेदाज्ञा, धार्मिक समादेश (विप० 'अर्थवाद' अर्थात् व्याख्यापरक उक्ति जिसमें आख्यान और दृष्टान्तों का चित्रण हो दे० अर्थवाद) – श्रद्धा वित्तं विधिश्चेति त्रितयं तत्समागतम् श० ७।२९, रघु० २।१६
5. कोई धार्मिक कृत्य या संस्कार, धार्मिक रस्म, संस्कार–स चेत् स्वयं कर्मसु धर्मचारिणां त्वमंतरायो भवसि च्युतो विधि:–रघु० ३।४५, १।३४
6. व्यवहार, आचरण
7. दशा विक्रम०४
8. रचना, बनावट सामग्र्यविघौं– कु० ३।२८, कल्याणी विधिषु विचित्रता विधातु: कि० ७।७
9. स्रष्टा
10. भाग्य, देव, किस्मत विधौ वामारंभे मम समुचितैषा परिणतिः मा० ४।४
11. हाथियों का खाद्य पदार्थ
12. काल
13. डाक्टर, वैद्य
14. विष्णु ।
समस्त पद
~ज्ञ
(वि०) कर्मकाण्ड का ज्ञाता
(–ज्ञः)
कर्मकाण्ड में निष्णात ब्राह्मण, कर्मकाण्डी,
~दृष्ट, ~विहित
(वि०) नियत, विहित,
~द्वैधम्
निययों की विविधता, विधि या समादेश की विभिन्नता,
~पूर्वकम्
(अव्य०) नियमानुकूल,
~प्रयोगः
नियम का व्यवहार,
~योग:
भाग्य का बल या प्रभाव,
~वधूः
(स्त्री०) सरस्वती का विशेषण,
~हीन
(वि०) नियम शून्य, अनधिकृत, अनियमित ।


विधिः [वि+धा+कि]


1. उपयोग, प्रयोग
2. अनुष्ठान, अभ्यास
3. प्रणाली, रीति, ढंग
4. नियम
5. कानून (विप० अर्थवाद)
6. धर्मकृत्य
7. व्यवहार
8. आचरण
9. सृष्टि
10. निर्माण
11. भाग्य
12. हाथी का आहार
13. वैद्य
14. उपाय. तरकीब ।
समस्त पद
~अन्तः
विधिपरक मूल पाठ का उपसंहारात्मक भाग,
~अर्थः
विधि का आशय,
~कर
(वि०) विधान को कार्य में परिणत करने वाला,
~यज्ञः
विधिविधान के अनुसार अनुष्ठित यज्ञ
~लक्षणम्
विधि का स्वरूप,
~लोपः
विधान का अतिक्रमण,
~विपर्ययः, ~विपर्यासः
दुर्भाग्य,
~विभक्तिः
( स्त्री० ) विधिलिङ् के प्रत्यय
~वशात्
(अ०) भाग्य से, विधिवशाद्दूरबन्धुर्गतोहम् मेघ०६।

परिशिष्ट



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