विधेय (सं० कृ०) [वि+धा+यत्]
1. किये जाने के योग्य, अनुष्ठेय
2. विहित या नियत किये जाने के योग्य
3.
(क) आश्रित, निर्भर –अथ विधिविधेयः परिचयः–मा० २।१३
(ख) अधीन, प्रभावित, नियन्त्रित, दमन किया गया, परास्त किया गया (प्रायः समास में) निद्राविधेयं नरदेवसैन्यम्–रघु० ७।६२, संभाव्यमानस्नेहरसेनाभिसंधिना विधेयीकृतोऽपि – मा० १, भग० २।६४, मुद्रा० ३३१, शि० ३।२०, रघु० १९।४
4. आज्ञाकारी, शासनीय, अनुवर्ती, वश्य, – अविधेयेंद्रियः पुंसां गौरिवैति विधेयताम–कि० ११।३३
5. (व्या०) विधेय–(कर्ता के संबंध में कही गई बात) होने के योग्य–अत्र मिथ्यामहिमत्वं नानुवाद्यं अपि तु विधेयम्–काव्य ७,
~यम्
1. जो किया जाना चाहिए, कर्तव्य,–कि० १६।६२
2. प्रतिज्ञा या प्रस्थापना की उक्ति,
~यः
सेवक, भृत्य ।
समस्त पद
~अविमर्शः
रचनासंबंधी दोष जिससे विधेय आश्रित स्थिति का हो जाय या उसका अधूरा कथन किया जाय–अविमृष्टः प्राधान्येनानिदिष्टो विधेयांशो यत्र –काव्य ० ७, उदा० उस स्थान पर देखो,
~आत्मन्
(तुं०) विष्णु,
~ज्ञ
(वि०) जो अपना कर्तव्य जानता है–पंच० १।३३७,
~पदम्
1. सम्पन्न किया जाने वाला उद्देश्य
2. कर्ता के संबंध में कहीं गई उक्ति –विधेय ।