विंध्यः [विदधाति करोति भयम्]
एक पर्वत श्रेणी जो उत्तर भारत को दक्षिण से पृथक् करती है, यह सात कुल पर्वतों में से एक है, यह मध्यदेश की दक्षिणी सीमा है, दे० मनु० २।२१, (एक उपाख्यान के अनुसार विन्ध्य पर्वत को मेरु पर्वत हिमालय पहाड़) से ईर्ष्या हुई । अतः उसने सूर्य से मांग की कि जिस प्रकार वह मेरु के चारों ओर घूमता है, उस प्रकार उसे विन्ध्य के चारों ओर घूमना चाहिए, सूर्य ने विन्ध्य पर्वत की मांग ठुकरा दी । फलतः विन्ध्य पर्वत ने ऊपर को उठना आरंभ किया सूर्य और चन्द्रमा का मार्ग रोका जा सके । देवताओं में आतंक छा गया, उन्होंने अगस्त्य मुनि से सहायता मांगी अगस्त्य विंध्य पर्वत के पास गया और उससे निवेदन किया कि जरा नीचे झुक जाओ जिससे कि मुझे दक्षिण में जाने का मार्ग मिले, और जब तक मैं वापिस न आऊँ, इसी प्रकार झके रहो । विध्य पर्वत ने इस बात को मान लिया (क्योंकि एक वर्णन के अनुसार अगस्त्य मुनि विंध्य पर्वत का गुरु मा जाता है) परन्तु अगस्त्य फिर दक्षिण से वापिस लौटा, और विध्य को मेरु जैसी उत्तुंगता न मिल सकी)
2. शिकारी ।
समस्त पद
~अटवी
विन्ध्य महावन,
~कूटः, ~कूटनम्
अगस्त्य ऋषि के विशेषण,
~वासिन्
(पुं)वैयाकरण व्याडि का विशेषण,
(–नी)
दुर्गा का विशेषण ।