संस्कृत-शब्दकोशः

विपिनौकस् विपुलग्रीव

विपुल

विपुल (वि०) [विशेषेण पोलति–वि+पुल्+क]


1. विशाल, विस्तृत, आयत, विस्तीर्ण, चौड़ा, प्रशस्त –विपुलं नितम्बदेशे –मालवि० ३।७, शिरसि तनुविपुलश्च मध्यदेशे –मृच्छ० ३।२२, इसी प्रकार विपुलम् पृष्ठम्, विपुलः कुक्षिः
2. बहुत, पुष्कल, पर्याप्त, कि० १८।१४
3. गहरा, अगाध–महावी० १।२, रोमाञ्चित, पुलकित शि० १६।३, (यहाँ 'प्रथम' अर्थ भी घटता है,
~ल:
1. मेरु पर्वत
2. हिमालय पर्वत
3. संमाननीय पुरुष ।
समस्त पद
~छाय
(वि०) छायादार, छायामय,
~जघना
विशाल कूल्हों वाली स्त्री,
~मति
(वि०) मनीषी, प्रज्ञावान्,
~रसः
गन्ना, ईख ।



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