विबोधः [विबुध् +घञ्]
1. जागरण, जागते रहना2. प्रत्यक्षज्ञान, खोजना3. बुद्धि, प्रतिभा4. जाग जाना, सचेत होना, अलं० में ३३ या ३४ व्यभिचारी भावों में से एक,–निद्रानाशोत्तरं जायमानो बोधो विबोधः–रस०।