विभावः [वि+भू+घञ्]
मन या शरीर को किसी विशेष स्थिति में विकसित करने वाली दशा, रसभाव की उद्बोधक स्थिति, तीन मुख्य भावों में से एक (दूसरे दो हैं–अनुभाव तथा व्यभिचारीभाव) रत्याद्युद्बोधका लोके विभावाः काव्यनाट्ययो:–सा० द० ६१, (इसके मुख्य अवान्तर भेद हैं–आलंबन और उद्दीपक–दे० आलंबन)
2. मित्र, परिचित ।