विरहः [वि+रह्+अच्]
1. विछोह, वियोग
2. विशेषतः प्रेमियों की जुदाई–सा विरहे तव दीना गीत० ४, क्षणमपि विरहः पुरा न सेहे तदेव, मेघ० ८, १२, २९, ८५, ८७
3. अनुपस्थिति
4. अभाव
5. उजड़ना, परित्याग, छोड़ देना ।
समस्त पद
~अनलः
वियोगाग्नि,
~अवस्था
वियोगदशा,
~आर्त, ~उत्कण्ठ, ~उत्सुक
(वि०) वियोग का कष्ट भोगने वाला, बिछोह के कारण दुःखी,
~उत्कण्ठिता
वह स्त्री जो अपने पति या प्रेमी के वियोग से दु:खी है, काव्यग्रंथों में वर्णित एक नायिका दे० सा० द० १२१,
~ज्वरः
वियोग की वेदना या ज्वर ।