विवरम् [वि+वृ+अच्]
1. दरार, छिद्र, रन्ध्र, खोखलापन, रिक्तता –यच्चकार विवरं शिलाघने ताडकोरसि स रामसायक: –रघु० ११।१८, ९।६१, १९।७
2. अन्तःस्थान, अन्तराल, बीच की जगह –श० ७।७
3. एकान्त स्थान –कि० १२।३७
4. दोष, त्रुटि, ऐब, कमी
5. विच्छेद, घाव
6. 'नौ' की संख्या ।
समस्त पद
~नालिका
बंसरी, बंसी, मुरली ।
विवरम् [वि+वृ+अच्]
पाताल लोक ।
परिशिष्ट