संस्कृत-शब्दकोशः

विश्लेषित विश्वगोचर

विश्व

विश्व (सा० वि०) [विश्+व]


1. सारे, सारा, समस्त, सार्वलौकिक
2. प्रत्येक, हरेक, (पुं० ब० व०) दस देवों का समूह (यह विश्वा' के पुत्र समझे जाते हैं, इनके नाम हैं –
“वसुः सत्यः ऋतुर्दक्षः काल: कामो धृतिः कुरुः ।
पुरूरवा माद्रवाश्च विश्वेदेवाः प्रकीर्तिताः ॥”
~श्वम्
1. सम्पूर्ण सृष्टि, समस्त संसार –इदं विश्व पाल्यम् –उत्तर० ३।३०, विश्वस्मिन्नधुनान्यः कुलव्रतं पालयिष्यति कः –भामि० १।१३
2. सूखा अदरक, सोंठ ।
समस्त पद
~आत्मन्
(पुं)
1. परमात्मा (विश्व की आत्मा)
2. ब्रह्मा का विशेषण
3. शिव का विशेषण –अथ विश्वात्मने गौरी संदिदेश मिथः सखीम् – कु० ६।१
4. विष्णु का विशेषण,
~ईशः, ~ईश्वरः
1. परमात्मा, विश्व का स्वामी
2. शिव का विशेषण,
~कद्रु
(वि०) दुष्ट, नीच, दुर्वृत्त,
(–द्रु:)
1. शिकारी कुत्ता, मृगयाकुक्कुर
2. स्वस्थ,
~कर्मन्
(पुं०)
1. देवों का शिल्पी, तु० त्वष्टृ
2. सूर्य का विशेषेण,
°जा
, °सुता
सूर्य की पत्नी संज्ञा का विशेषण,
~कृत्
(पुं०)
1. सब प्राणियों का स्रष्टा
2. विश्वकर्मा का विशेषण
~केतुः
अनिरुद्ध का विशेषण,
~गंधः
प्याज,
(–धम्)
लोबान, गुग्गुल,
~गंधा
पृथ्वी,
~जनम्
मानवजाति,
~जनीन, ~जन्य
(वि०) मानवमात्र के लिए हितकर, मनुष्य जाति के उपयुक्त, सब मनुष्यों के लिए लाभकर –भट्टि २।४८, २१।१७,
~जित्
(पुं०)
1. यज्ञ विशेष का नाम –रघु० ५।१
2. वरुण का पाश,
~देव
विश्व (पुं०) के नीचे दे०,
~धारिणी
पृथ्वी,
~धारिन्
(पुं०),
~नाथः
विश्व का स्वामी, शिव का विशेषण,
~पा
(पुं०)
1. सब का रक्षक
2. सूर्य
3. चन्द्रमा
4. अग्नि
~पावनी, ~पूजिता
तुलसी का पौधा,
~प्सन्
(पु०)
1. देव
2. सूर्य
3. चन्द्रमा
4. अग्नि का विशेषण
~भुज्
(वि०) सर्वोपभोक्ता, सब कुछ खाने वाला (पुं०) इन्द्र का विशेषण,
~भेषजम्
सूखा अदरक, सोंठ,
~मूर्ति
(वि०) सब रूपों में विद्यमान, सर्वव्यापक, विश्वव्यापी,–मा० १।३,
~योनिः
1. ब्रह्मा का विशेषण
2. विष्णु का विशेषण,
~राज्, ~राजः
विश्वप्रभु,
~रूप
(वि०) सर्व व्यापक, सर्वत्र विद्यमान
(–प:)
विष्णु का विशेषण,
(–पम्)
अगर की लकड़ी,
~रेतस्
(पुं०) ब्रह्मा का विशेषण,
~वाह
( (स्त्री० –विश्वौही) सब कुछ ढोने वाला, सब का भरण पोषण करने वाला,
~सहा
पृथ्वी,
~सृज्
(पुं०) ब्रह्मा का विशेषण, स्रष्टा प्रायेण सामग्र्यविधौ गुणानां पराङ्



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