विषम (वि०) [विगतो विरुद्धो वा समः–प्रा० स०]
1. जो सम या समान न हो, खुरदरा, ऊबड़–खाबड़ –पथिषु विषमेष्वप्यचलता –मुद्रा० ३।३, पञ्च० १६४, मेघ० १९
2. अनियमित, असमान –मा० ९।४३
3. उच्चावच, असम
4. कठिन, समझने में दुष्कर, आश्चर्यजनक –कि० २।३
5. अगम्य, दुर्गम –कि० २।३
6. मोटा, स्थूल
7. तिरछा –मा० ४।२
8. पीड़ाकर, कष्टदायक –भर्तृ० ३।१०५ १. बहुत मजबूत, उत्कट –मा० ३।९
10. खतरनाक, भयानक –मृच्छ० ८।१, २७ मुद्रा० १।१८, २।२०
11. बुरा, प्रतिकूल, विपरीत –पंच० ४।१६
12. अजीब, अनोखा, अनुपम
13. बेईमान, कलापूर्ण,
~मम्
1. असमता
2. अनोखापन
3. दुर्गम स्थान, चट्टान, गड्ढा आदि
4. कठिन या खतरनाक स्थिति, कठिनाई, दुर्भाग्य, –सुप्तं प्रमत्तं विषमस्थितं वा रक्षन्ति पुण्यानि पुराकृतानि –भर्तृ० २।९७, भग० २।२
5. एक अलंकार का नाम जिसमें कार्य कारण के बीच में कोई अनोखा या अघटनीय संबंध दर्शाया जाता है यह चार प्रकार का माना जाता है दे० काव्य०, का० १२६ व १२७,
~मः
विष्णु का नाम ।
समस्त पद
~अक्षः, ~ईक्षणः, ~नयनः, नेत्रः, ~लोचनः
शिव के विशेषण,
~अन्नम्
अनोखा या अनियमित आहार
~आयुधः, ~इषुः, ~शरः
कामदेव के विशेषण,
~कालः
अननुकूल ऋतु,
~चतुरस्रः, ~चतुर्भुजः
विषभ कोण वाला चतुष्कोण,
~छदः
सप्तपर्ण नाम का पेड़,
~ज्वरः
कभी कम तथा कभी अधिक होने वाला बुखार,
~लक्ष्मीः
दुर्भाग्य,
~विभागः
सम्पत्ति का असमान वितरण,
~स्थ
(वि०)
1. दुर्गम स्थिति में होने वाला
2. कठिनाई में रहने वाला, अभागा ।
विषम (वि०) [प्रा० ब०]
1. जो पूरा न बँट सके
2. अनुपयुक्त ।
समस्त पद
~बाणः
कामदेव,
~नेत्रम्
शिव की तीसरी आँख,
~नेत्र:
शिव का एक विशेषण,
~वृत्तम्
छंद जिसके चरण सम न हों ।
परिशिष्ट