विष् (जुहो० उभ० वेवेष्टि, वेविष्टे, विष्ट)
1. घेरना
2. फैलाना, विस्तार करना, व्यापक होना
3. सामने जाना, मुक़ाबला करना (परिनिष्ठित संस्कृत में इसका प्रयोग बहुधा नहीं होता) ।
ii (क्र्या० पर० विष्णाति) वियुक्त करना, अलग–अलग करना ।
iii (भ्वा० पर० वेषति) छिड़कना, उडेलना ।
विष् (स्त्री०) [विष्+क्विप्]
1. मल, विष्ठा, लीद
2. फैलाना, प्रसारण
3. लड़की जैसा कि 'विट्पति' में ।
समस्त पद
~कारिका
(विट्कारिका) एक प्रकार का पक्षी,
~ग्रहः
(विड्ग्रहः) कोष्ठबद्धता, कब्ज,
~चरः, ~वराहः
(विट्चरः, विड्वराहः) पालतू या गाँव का सूअर,
~लवणम्
(विड्लवणम्) एक प्रकार का औषधियों में प्रयुक्त होने वाला नमक,
~सङ्गः
(विट्सङ्गः) कोष्ठबद्धता, क़ब्ज,
~सारिका
(विट्सारिका) एक प्रकार का पक्षी, मैना ।