संस्कृत-शब्दकोशः

वीभ् वीरक

वीर

वीर (वि) [अजे: रक् वीभावश्च]


1. शूर, वीर
2. ताकतवर, शक्तिशाली,
~रः
1. शूरवीर, योद्धा, प्रजेता –कोऽप्येष संप्रति नवः पुरुषावतारो वीरो न यस्य भगवान् भृगुनन्दनोऽपि –उत्तर० ५।३४
2. (आलं० में) वीरभावना, वीररस, इसके चार भेद (दानवीर, धर्मवीर, दयावीर और युद्धवीर) किये गये हैं, स्पष्टीकरण के लिए दे० इन शब्दों को
3. अभिनेता
4. आग
5. यज्ञ की अग्नि
6. पुत्र
7. पति
8. अर्जुन वृक्ष
9. विष्णु का नाम,
~रम्
1. नरकुल
2. मिर्च
3. चावल का माड़
4. उशीर का जड़, खस ।
समस्त पद
~आशंसनम्
1. निगरानी रखना
2. युद्ध में जोखिम से भरा पद
3. छोड़ी हुई आशा,
~आसनम्
1. योगाभ्यास करते समय एक विशेष मुद्रा, परिभाषा के लिए दे० पर्यंक (३)
2. एक घुटना मोड़ कर बैठना
4. संतरी की चौकी,
~ईशः, ~ईश्वरः
1. शिव के विशेषण
2. महान् वीर,
~उज्झः
वह ब्राह्मण जो यज्ञाग्नि में आहुति नहीं डालता, अग्निहोत्र न करने वाला ब्राह्मण,
~कीटः
तुच्छ सैनिक,
~जयन्तिका
1. रणनृत्य
2. संग्राम, युद्ध,
~तरुः
अर्जुनवृक्ष,
~धन्वन्
(पुं०) कामदेव,
~पानम्(णम्)
एक उत्तेजक या श्रमापहारक तेज जो सैनिक लोग युद्ध के आरम्भ या अवसान पर पीते हैं,
~भद्रः
1. एक शक्तिशाली शूरवीर जिसे शिव ने अपनी जटाओं से निकाला था –दे० 'दक्ष'
2. माना हुआ योद्धा
3. अश्वमेध यज्ञ के उपयुक्त घोड़ा
4. एक प्रकार का सुगन्धित घास,
~मुद्रिका
पैर की मध्यमा अंगुली में पहना जाने वाला छल्ला,
~रजस्
(नपुं०) सिन्दूर,
~रस
1. वीरता का भाव
2. सामरिक भावना,
~रेणुः
भीमसेन का नाम,
~विप्लावकः
शूद्र से धन लेकर हवन करने वाला,
~वृक्षः
1. अर्जुन वृक्ष
2. भिलावें का वृक्ष,
~सूः
(स्त्री०) शूरवीर पुरुष की माता (इसी प्रकार –‘वीरप्रसवा, –प्रसूः, –प्रसविनी’),
~सैन्यम्
लहसुन,
~स्कन्धः
भैंसा,
~हन्
(पुं०)
1. वह ब्राह्मण जिसने दैनिक अग्निहोत्र करना छोड़ दिया है
2. विष्णु ।



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