वृत्तिः [वृत्+क्तिन्]
1. अस्तित्व, सत्ता
2. टिकना, रहना, रुख, किसी विशेष स्थिति में होना जैसा कि विरुद्धवृत्ति या विपक्षवृत्ति में
3. अवस्था, दशा
4. कार्य, गति, कृत्य, कार्यवाही – शतैस्तमक्ष्णामनिमेषवृत्तिभिः –रघु० ३।४३, कु० ३।७३, श० ४।१५
5. क्रम, प्रणाली, श० २।११
6. आचरण, व्यवहार, चालचलन, कार्यपद्धति –कुरु प्रियसखीवृत्तिं सपत्नीजने –श० ४।१८, मेघ० ८, वैतसीवृत्ति, वकवृत्ति आदि
7. पेशा, व्यवसाय, काम–धंधा, रोजगार, जीवनचर्या (प्रायः समास के अन्त में)–वार्धके मुनिवृत्तीनाम् –रघु० १।८, श० ५।६, पंच० ३।१२५
8. जीविका, संपोषण, जीविका के उपाय (बहुधा समास में) –रघु० २।३८, श० ७।१२, कु० ५।२८, (जीविका के विभिन्न उपायों के लिए) दे० मनु० ४।४–६
9. मजदूरी, भाड़ा
10. क्रियाशीलता का कारण
11. सम्मानपूर्ण बर्ताव
12. भाष्य, टीका, विवृति –सद्वृत्तिः सन्निबन्धना –शि० २।११२, काशिकावृत्तिः आदि
13. चक्कर काटना, मुड़ना
14. किसी वृत्त या पहिये की परिधि
15. (व्या०) जटिल रचना जिसकी व्याख्या करने की आवश्यकता पड़े
16. शब्द की वह शक्ति जिसके द्वारा किसी अर्थ का अभिधान, संकेत अथवा व्यंजना की जाय (यह शक्तियाँ अभिधा, लक्षणा और व्यंजना के नाम से विख्यात)
17. रचना की शैली (यह चार हैं –कैशिकी, भारती, सात्वती और आरभटी) ।
समस्त पद
~अनुप्रासः
एक प्रकार का अनुप्रास,–दे० काव्य० ९,
~उपायः
जीविका का उपाय,
~कर्षित
(वि०) जीविका के अभाव में अत्यन्त दुःखी –मनु० ८।४११,
~चक्रम्
राज चक्र –पञ्च० १।८१,
~छेदः
जीविका के साधनों से वञ्चित,
~भगः, ~वैकल्यम्
जीविका का अभाव –पञ्च० १।१५३,
~स्थ
(वि०)
1. किसी भी स्थिति या नियुक्ति में रहने वाला
2. सदाचारी, अच्छा बर्ताव करने वाला,
(–स्थः)
छिपकली, गिरगिट ।