वृन्दारक (वि०) (स्त्री० –‘का’, –‘रिका’) [वृन्द+आरकन् पक्षे टाप्, इत्वम् च]
1. अधिक, बड़ा, बहुत
2, प्रमुख, उत्तम, श्रेष्ठ
3. सुहावना, आकर्षक, सुन्दर, मनोहर,
4. आदरणीय, सम्माननीय,
~कः
1. देव, सुर, श्रितो वृंदारण्यं नतनिखिलवृंदारकवृतः –भामि० ४।५
2. किसी भी चीज़ का मुख्य (समास के अन्त में) दे० (२) ऊपर ।