वृष् (भ्वा० पर० वर्षति, वृष्ट)
1. बरसना (बहुधा 'इन्द्र' 'पर्जन्य' या बादल आदि सार्थक शब्दों के साथ कर्ता के रूप में, या कभी–कभी भावात्मक रूप से) –द्वादशवर्षाणि न ववर्ष दशशताक्ष: –दश०, काले वर्षतु मेघाः, गर्ज वा वर्ष वा शक्र –मृच्छ० ५।३१, मेघा वर्षन्तु गर्जन्तु मुञ्चन्त्वशनिमेव वा –५।१६
2. वारिश करना, उडेलना, बौछार करना –वर्षतीवाञ्जनं नभः –मृच्छ० १।३४ इसी प्रकार –शरवृष्टिम् कुसुमवृष्टिं वर्षति आदि
3. बरसाना ढलकाना
4. अनुदान देना, अर्पण करना
5. तर करना
6. पैदा करना, उत्पन्न करना
7. सर्वोपरि शक्ति रखना
8. प्रहार करना, चोट मारना,
अभि–
1. बौछार करना, बरसाना, उडेलना, छिड़कना –रघु० १।८४, १०।४८
2. प्रदान करना, अर्पण करना,
प्र–
बरसाना, बौछार करना –यस्यायमभितः पुष्पैः प्रवृष्ट इव केसर: –राम० (=उत्तर० ६।३६) ।
ii (चुरा० आ० वर्षयते)
1. शक्तिशाली या प्रमुख होना,
2. उत्पन्न करने की शक्ति रखना ।