वेणिः (स्त्री०) [वेण् + इन्]
1. गुंथे हुए बाल, बालों की मींढी,–तरङ्गिणी वेणिरिवायता भुवः –शि० १२।७५, मेघ० १८
2. बालों की एक अनलंकृत चोटी जो पीठ पर लटकती रहती हैं (कहा जाता है कि वही स्त्रियां ऐसी चोटी करती हैं जिनके पति घर पर न हों) –वनान्निवृत्तेन रघूत्तमेन मुक्ता स्वयं वेणिरिवाबभासे –रघु० १४।१२, अबलावेणि मोक्षोत्सुकानि –मेघ० ९९, कु० २।६१
3. अनवच्छिन्न प्रवाह, धारा, सरिता– जलवेणिरम्यां रेवां यदि प्रेक्षितुमस्ति कामः–रघु० ६।४३, मेघ० २९, तु० 'त्रिवेणी' शब्द की भी
4. दो या अधिक नदियों का संगम
5. गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम
6. एक नदी का नाम ।सम०
~बन्धः
गुथे हुए बाल, मींढी –रघु० १०।४७,
~वेधनी
जोक,
~वेधिनी
कंघी,
~संहारः
1. बालों को गूंथ कर मींढी बनाना –वेणी० ६
2. भट्टनारायणकृत एक नाटक का नाम ।
वेणिः [वेण्+इन्]
1. फिर संयुक्त की गई संपत्ति जो पहले से बंटी हुई थी
2. जल प्रवाह, झरना ।
परिशिष्ट