वैहार्य (वि०) [विशेषेण ह्नियते–वि+हृ+ण्यत्+अण्]
जिससे हंसी दिल्लगी की जाय, जिसे उपहास का विषय बनाया जाय (जैसे पत्नी का भाई, या ससुराल का कोई रिस्तेदार) ।