व्यतिकरः [वि+अति+कृ+अप्]
1. मिश्रण, अन्त:मिश्रण, इकट्ठा मिला देना –तीर्थे तोयव्यतिकरभवे जह्नुकन्यासरय्वोः–रघु० ८।९५, व्यतिकर इव भीमस्तामसो वैद्युतश्च –उत्तर० ५।१२, मा० ९।५२
2. सम्पर्क, मिलाप, सम्मिलन –मालवि० १।४, शि० ४।५३, ७।२८
3. रगड़ना –कु० ५।८५
5. घटना, सम्भूति, वृत्तान्त, वस्तु, मामला –एवंविधे व्यतिकरे –'ऐसी बात होने पर'
6. अवसर
7. मुसीबत, संकट
8. पारस्परिक सम्बन्ध, पारस्परिकता
9. विनिमय, अदलाबदली ।