संस्कृत-शब्दकोशः

व्यभिचारिन् व्यय

व्यभीचार

व्यभीचारः [वि+अभि+चर्+घञ्]


1. दूर चले जाना, विचलन, सन्मार्ग छोड़ देना, कुमार्ग का अनुसरण करना,–मंत्रज्ञमव्यसनिनं व्यभिचारविवर्जितम् –हि० ३।१६ भग० १४।२६
2. अतिक्रमण, उल्लंघन –मनु० १०।२४
3. अशुद्धि, जुर्म, पाप
4. विच्छेद्यता, अलग होने की सामर्थ्य
5. अभक्ति, अनास्था, पति–पत्नी में अविश्वास, पतिव्रत या पत्नीव्रत का अभाव, –व्यभिचारात्तु भर्तुः स्त्री लोके प्राप्नोति गर्ह्यताम् –मनु० ५।१६४, वाङ्मनः कर्मभिः पत्यौ व्यभिचारो यथा न मे –रघु० १५।८१, याज्ञ० १।७१
6. असंगति, अनियमितता, अपवाद
7. (तर्क० में) आभासी हेतु, हेत्वाभास, साध्य के न होने पर भी हेतु की विद्यमानता ।



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