संस्कृत-शब्दकोशः

व्यभीचार व्ययन

व्यय

व्यय (वि०) [वि+इ+अच्]


परिवर्तनीय, परिणामशील, विकारवान् –तु० अव्यय,
~यः
1.
(क) हानि, लोप, विनाश –आपाद्यते न व्ययमन्तरायैः कच्चिन्महर्षेस्त्रिविधं तपस्तत् –रघु० ५।५, १२।३३,
(ख) लागत लगाना, त्याग –प्राणव्ययेनापि मया विधेयः –मा० ४।४, कु० ३।२३
2. रुकावट, अड़चन –रघु० १५।३७,
3. क्षय, ह्रास, पराजय, अधःपतन
4. खर्च, मूल्य, परिव्यय, विनियोग, प्रयोग, (विप० ‘आय’) –आये दुःखं व्यये दुःखं धिगर्थाः कष्टसंश्रयाः –पंच० १।१६३, आयाधिकं व्ययं करोति 'अपनी आय से अधिक व्यय करता है' –रघु० ५।१२, १५।३, मनु० ९।११
5. अपव्यय, फिजूलखर्ची ।
समस्त पद
~पर
(वि०) मुक्तहस्त से खर्च करने वाला,
~पराङ्मुख
(वि०) कृपण, कंजूस, मक्खीचूस,
~शील
(वि०) अतिव्ययी, फिजूलखर्च,
~शुद्धिः
(स्त्री०) हिसाब चुकाना ।


व्ययः [वि+इण्+अच्]


(व्या० में) रूपान्तर, शब्द या धातु का विभक्ति में प्रत्यय लगा कर रूप बनाना ।

परिशिष्ट



Correction: