व्यसनम् [वि+अस्+ ल्युट्]
1. फेंक देना, दूर कर देना, वियोजन, विभाजन
3. उल्लंघन, व्यतिक्रमण
4. हानि, विनाश, पराजय, पतन, दोष, दुर्बलपक्ष –अमात्यव्यसनम् –पंच० ३, स्वबलव्यसने –कि० १३।१५
5. ( क ) विपत्ति, दुर्भाग्य, दु:ख, अनिष्ट, संकट, अभाग्य –अज्ञातभर्तृव्यसना मुहूर्तं कृतोपकारेव रतिर्बभूव –कु० ३।७३, ४।३०, रघु० १२।५७
(ख) आपत्काल, आवश्यकता –स सुहृद् व्यसने यः स्यात् –पंच० १।३२७ 'आवश्यकता पड़ने पर जो मित्र रहे वही मित्र है'
6. (सूर्य आदि का) अस्त होना –तेजोद्वयस्य युगपद् व्यसनोदयाभ्याम् –श० ४।१, (यहाँ 'व्यसन' का अर्थ 'पतन' भी है) ७. दुर्व्यसन, बुरी लत, बुरी आदत –मिथ्यैव व्यसनं वदति मृगयामीदृग् विनोद: कुतः– श० ४।५, रघु० १८।१४, याज्ञः १।३०९ (इस प्रकार के दुर्व्यसन दस बताये गये हैं –मनु० ७।४७–८) समानशीलव्यसनेषु सख्यं –सुभा०
8. संलग्नता, जुट जाना, परिश्रमपूर्वक आसक्ति –विद्यायां व्यसनं भर्तृ० २।६२–३
9. बहुत ज्यादा आदी होना
10. जुर्म, पाप
11. दण्ड
12. अयोग्यता, अक्षमता
13. निष्फल प्रयत्न
14. हवा, वायु ।
समस्त पद
~अतिभारः
भारी अनर्थ या संकट –रघु० १४।६८,
~अन्वित, ~आर्त, ~पीडित
(वि०) संकटग्रस्त, दुःख में फंसा हुआ ।
व्यंसनम् [वि+अंस्+ल्युट्]
ठगना, धोखा देना ।