व्रजः [व्रज्+क]
1. समुच्चय, संग्रह, रेवड़, समूह –नेत्रव्रजाः पौरजनस्य तस्मिन् विहाय सर्वान्नृपतीन्निपेतुः –रघु० ६७, ७।६७, शि० ६।६, १४।३३
2. ग्वालों के रहने का स्थान
3. गोष्ठ, गौशाला –शि० २।६४
4. आवास, विश्रामस्थल
5. सड़क, मार्ग
6. बादल
7. मथुरा के निकट एक जिला ।
समस्त पद
~अङ्गना, ~युवतिः
(स्त्री०) व्रज में रहने वाली स्त्री, ग्वालन –भामि० २।१६५,
~अजिरम्
गोशाला,
~किशोरः, ~नाथः, ~मोहनः, ~वरः, ~वल्लभः
कृष्ण के विशेषण ।