शक्
i (स्वा० पर० शक्नोति, शक्त)
1. योग्य होना, सक्षम होना, सबल होना, अमल में लाना (प्रायः 'तुमुन्नन्त' के साथ, प्रयुक्त होकर ‘सकना’ अर्थ प्रकट करना) –अदर्शयन् वक्तुमशक्नुवत्यः शाखाभिरावर्जितपल्लवाभिः –रघु० १३।२४, भट्टि० ३।६, मेघ० २० कभी कभी कर्म० या संप्र० के साथ –मनु० ११।१९४
2. सहन करना, बर्दाश्त करना
3. शक्तिशाली होना –कर्मवा० समर्थ होना, सम्भव होना, व्यवहार के योग्य होना (निम्नांकित तुमुन्नंत को कर्मवा० का अर्थ देना) –तत्कर्तुं शक्यते 'यह किया जा सकता है', इच्छा० (शिक्षति)
1. समर्थ होने की इच्छा करना
2. सीखना ।
ii (दिवा० उभ०–शक्यति-ते, शक्त)
1. समर्थ होना, अमल में लाने की शक्ति रखना
2. सहन करना, बर्दाश्त करना ।