शतम् [दश दशतः परिमाणमस्य –दशन्+त, श आदेशः नि० साधु:]
सौ की संख्या –निःस्वो वष्टि शतं –शान्ति० २।६, शतमेकोऽपि संधत्ते प्रकारस्थो धनुर्धरः –पंच० १।२२९ ('शत' शब्द किसी भी लिंग के बहुवचनांत संज्ञा शब्दों के साथ एक वचन में ही प्रयुक्त होता है –शतं नराः, शतं गावः, या शतं गृहाणि, इस दशा में यह संख्यावाचक विशेषण माना जाता है, परन्तु कभी कभी द्विवचन तथा बहुवचन में भी प्रयुक्त होता है – द्वे शते, दश शतानि आदि । संब० के संज्ञाशब्द के साथ भी प्रयुक्त होता है –गवां शतम्, समास के अन्त में यह अपरिवर्तित रूप में रह सकता है –भव भर्ता शरच्छतम्, या बदल कर 'शती' हो जाता है यथा गोवर्धनाचार्य की कृति 'आर्यासप्तशती')
2. कोई भी बड़ी संख्या ।
समस्त पद
~अक्षी
1. रात्रि,
2. दुर्गादेवी,
~अङ्गः
गाड़ी, छकड़ा विशेषतः युद्धरथ,
~अनीकः
बूढ़ा आदमी,
~अरम्, ~आरम्
इन्द्र का वज्र,
~आनकम्
श्मशान, क़बरिस्तान,
~आनन्दः
1. ब्रह्मा
2. विष्णु, कृष्ण
3. विष्णु का वाहन
4. गौतम और अहिल्या का पुत्र, जनकराज का कुलपुरोहित –उत्तर० १।१६,
~आयुस्
(वि०) सौ वर्ष तक जीवित रहने वाला या टिकने वाला,
~आवर्तः, ~आवर्तिन्
(पुं०) विष्णु,
~ईशः
1. सौ के ऊपर शासन करने वाला,
2. सौ गाँव का शासक –मनु० ७।११५,
~कुम्भः
एक पहाड़ का नाम (कहते हैं कि यहाँ पर सोना पाया जाता है), –
भम्
सोना,
~कृत्वः
(अव्य०) सौ गुणा,
~कोटि
(वि०) सौ धार वाला, (–टिः)
इन्द्र का वज़्र, (स्त्री०) एक अरब या सौ करोड़ की संख्या, ~
ऋतुः
इन्द्र का विशेषण–रघु० ३।३८, ~
खण्डम्
सोना, ~
गु
(वि०) सौ गायों का स्वामी, ~
गुण, ~गुणित
(वि०) सौगुणा बढ़ा हुआ –विक्रम० ३।२२, ~
ग्रन्थिः
(स्त्री) दूर्वा घास, ~
ध्नी
1. एक प्रकार का शस्त्र जो अस्त्र की भांति प्रयुक्त किया जाय (कुछ विद्वानों के मतानुसार यह एक प्रकार का राकेट है, परन्तु दूसरों के मतानुसार यह एक प्रकार का विशाल पत्थर है जिसमें लोहे की शलाकाएँ जड़ी हुई हैं यह लम्बाई में 'चार ताल' है –शतघ्नी च चतुस्ताला लोहकण्टकसंचिता, या, अयः कण्टकसंछन्ना शतघ्नी महती शिला)– रघु० १२।९५
2. बिच्छू की मादा
3. गले का एक रोग ~
जिह्वः
शिव का विशेषण, ~
तारका, ~भिषज्, ~भिषा
(स्त्री०) सौ तारिकाओं का पुंज शतभिषा नामक नक्षत्र, ~
दला
सफ़ेद गुलाब, ~
द्रुः
(स्त्री०) पंजाब की एक नदी जिसका वर्तमान नाम सतलज है, ~
धामन्
(पुं०) विष्णु का विशेषण, ~
धार
(वि०) सौ घारों वाला,
(–रम्)
इन्द्र का वज्र, ~
धृतिः
1. इन्द्र का विशेषण,
2. ब्रह्मा का विशेषण
3. स्वर्ग, ~
पत्रः
1. मोर
2. सारस
3. खुट-बढ़ई पक्षी,
4. तोता या तोते की जाति,
(–त्रा)
स्त्री
(–त्रम्)
कमल–आवृत्तवृन्तशतपत्रनिभं (आननम्) वहन्त्या–मा० ११२९,
°योनिः
ब्रह्मा का विशेषण,–कम्पेन मूर्ध्नः शतपत्रयोनि (संभावयामास) कु० ७।३६, ~
पत्रकः
खुटबढ़ई, ~
पद्, ~पाद्
(वि०) सौ पैरों वाला, ~
पदी
कानखजूरा, ~
पद्मम्
1. वह कमल जिसमें सौ पंखड़ियाँ हों
2. श्वेत कमल, ~
पर्वन्
(पुं०) बाँस (स्त्री०)
1. आश्विन मास की पूर्णिमा
2. दूर्वा घास
3. कटुक का पौधा,
°ईशः
शुक्र, ग्रह, ~
भीरुः
(स्त्री०) अरबदेश की चमेली, ~
मख, ~मन्युः
1. इन्द्र के विशेषण, कि० २।२३, भट्टि० ११५, कु० २।६४, रघु० ९।१३
2. उल्लू, ~
मुख
(वि०)
1. जिसके सौ रास्ते हों
2. सौ द्वार या मुंह वाला–विवेकभ्रष्टानां भवति विनिपा तः शतमुखः –भर्तृ० २।१०, (यहाँ शब्द का (१) अर्थ भी है ।
(–खम्)
सौ रास्ते या द्वार,
(–खी)
बुहारी, झाड़ , ~
मूला
दूर्वा घास, दूबड़ा, ~
यज्वन्
(पुं०) इन्द्र का विशेषण, ~
यष्टिकः
सौ लड़ियों का हार, ~
रूपा
ब्रह्मा की एक पुत्री (जो ब्रह्मा की पत्नी भी मानी जाती है, अपने पिता के साथ इस व्यभिचार के परिणाम स्वरूप उससे स्वायम्भुव मनु का जन्म हुआ), ~
वर्षम्
सौ बरस, शताब्दी, ~
वेधिन्
(पुं०) एक प्रकार का खटमिठा शाक, चोका, ~
सहस्रम्
1. सौ हज़ार
2. कई हज़ार अर्थात् एक बड़ी संख्या, ~
साहस्र
(वि०)
1. सौ हजार से युक्त
2. सौ हजार में मोल लिया हुआ, ~
ह्रदा
1. बिजली, कु० ७।३९, मृच्छ० ५।४८
2. इन्द्र का वज्र ।
शतम् (नपुं०)
1. सौ
2. कोई बड़ी संख्या ।
समस्त पद
~चन्द्रः
तलवार या ढाल जो सौ चन्द्राङ्कनों से सुसज्जित हो,
~चरणा
शतपदी, कनखजूरा,
~पोन:
चलनी,
~मयूखः
चन्द्रमा,
~लोचनः
इन्द्र का विशेषण ।
परिशिष्ट