संस्कृत-शब्दकोशः

शबल शब्दन

शब्द

शब्द (चुरा० उभ० शब्दयति-ते, शब्दित)
1. ध्वनि करना, शोर मचाना
2. बोलना, बुलाना, आवाज़ देना –विततमृदुकराग्रः शब्दयन्त्या वयोभिः परिपतति दिवोऽङ्के हेलया बालसूर्यः–शि० ११।४७
3. नाम लेना, पुकारना –अत एव सागरिकेति शब्द्यते – रत्न० ४,
अभि–
नाम रखना,
प्र–
व्याख्या करना,
सम्–
बुलाना ।


शब्दः [शब्द्+घञ्]


1. ध्वनि (श्रोत्रेन्द्रिय का विषय, आकाशगुण, – रघु० १३।१
2. आवाज़, कलरव (पक्षियों का या मनुष्यादिकों का), कोलाहल, – विश्वासोपगमादभिन्नगतयः शब्दं सहन्ते मृगाः– श० १।१४, भग० १।१३, श० ३।१, मनु० ४।११३, कु० १।४५,
3. बाजे की आवाज़ – बाद्यशब्दः पंच० २।२४, कु० १।४५
4. वचन, ध्वनि, सार्थक ध्वनि, शब्द (परिभाषा के लिए दे० महाभाष्य की प्रस्तावना) – एकः शब्दः सम्यगधीतः सम्यक् प्रयुक्तः स्वर्गे लोके कामधुग्भवति, इसी प्रकार 'शब्दार्थौ'
5. विकारीशब्द, संज्ञा, प्रातिपदिक
6. उपाधि, विशेषण–यस्यार्थयुक्तं गिरिराजशब्दं कुर्वन्ति बालव्यजनैश्चमर्यः–कु० १।१३, श० २।१४, नृपेण चक्रे युवराजशब्दभाक् –रघु० ३।३५, २।५३, ६४, ३।४९, ५।२२, १८।४१, विक्रम० १।१
7. नाम, केवल नाम जैसा कि 'शब्दपति' में
8. शाब्दिक प्रामाणिकता (नैयायिकों के द्वारा 'शब्द प्रमाण' माना जाता है) ।
समस्त पद
~अतीत
(वि०) शब्दों की शक्ति से परे, अनिर्वचनीय,
~अधिष्ठानम्
कान,
~अध्याहारः
(शब्दन्यूनता को पूरा करने के लिए शब्दपूर्ति,
~अनुशासनम्
शब्दों का शास्त्र अर्थात् व्याकरण,
~अर्थः
शब्द के अर्थ
(र्थौ –द्वि० व०)
शब्द और उसका अर्थ अदोषौ शब्दार्थों–काव्य० १,
~अलङ्कारः
वह अलङ्कार जो अपने शब्द सौन्दर्य पर निर्भर करता है, तथा जब उसी अर्थ को प्रकट करने वाला दूसरा शब्द रख दिया जाता है तो उसका सौन्दर्य लुप्त हो जाता है (विप० ‘अर्थालङ्कार’) उदा० दे० काव्य० ९,
~आख्येय
(वि०) शब्दों में भेजा जाने वाला समाचार – मेघ० १०३
(–यम्)
मौखिक या शाब्दिक सन्देश,
~आडम्बरः
वाग्जाल, वाक्प्रपंच, शब्दाधिक्य, अतिशयोक्तिपूर्ण शब्द,
~आदि
(वि०) 'शब्द' से आरम्भ होने वाले (ज्ञान के विषय) रघु० १०।२५,
~कोशः
अभिधान, शब्दसंग्रह,
~गत
(वि०) शब्द के अन्दर रहने वाला,
~ग्रहः
1. शब्द पकड़ना
2. कान,
~चातुर्यम्
शैली की निपुणता, वाक्पटुता,
~चित्रम्
कविता की अन्तिम श्रेणी के दो उपभेदों में से एक (अवर या अधम) (इस प्रकार के काव्य में सौन्दर्य उन शब्दों के प्रयोग में है जो कर्णमधुर होते हैं, 'चित्र' के अन्तर्गत दिया हुआ उदाहरण देखो),
~चोरः
'शब्दचोर' साहित्यचोर,
~तन्मात्रम्
ध्वनि का सूक्ष्म तत्त्व,
~पतिः
नाममात्र स्वामी, नाम का प्रभु–ननु शब्दपतिः क्षितेरहं त्वयि मे भावनिबन्धना रति:–रघु० ८।५२,
~पातिन्
(वि०) शब्द सुन कर ही अदृश्य निशाना लगाने वाला, शब्दवेधी, निशाना लगाने वाला–रघु ० ९।७३,
~प्रमाणम्
शाब्दिक या मौखिक प्रमाण,
~बोधः
मौखिक साक्ष्य से प्राप्त ज्ञान
~ब्रह्मन्
(नपुं०)
1. वेद
2. शब्दों में निहित आध्यात्मिक ज्ञान, आत्मा या परमात्मसम्बन्धी ज्ञान –उत्तर० २।७, २०
3. शब्द का गुण, 'स्फोट',
~भेदिन्
(वि०) शब्दवेधी निशान लगाने वाला (पुं०)
1. अर्जुन का विशेषण
2. गदा
3. एक प्रकार का बाण,
~योनिः
(स्त्री०) धातु, मूल शब्द,
~विद्या, ~शासनम, ~शास्त्रम्
शब्दशास्त्र अर्थात् व्याकरण –अनन्तपारं किल शब्दशास्त्रम्–पंच० १, शि० २।११२, १४।२४,
~विरोधः
(शास्त्र में) शब्दों का विरोध,
~विशेषः
ध्वनि का एक भेद,
~वृत्तिः
(स्त्री०) साहित्य शास्त्र में शब्द का प्रयोग,
~वेधिन्
(वि०) ध्वनि सुनकर ही शब्दवेधी निशाना लगाने वाला – दे० 'शब्दपातिन्' (पुं०)
1. अर्जन का विशेषण
2. एक प्रकार का बाण,
~शक्तिः
(स्त्री०) शब्द की अभिव्यञ्जक शक्ति, शब्द की सार्थकता दे० शक्ति,
~शुद्धिः
(स्त्री०)
1. शब्दों की पवित्रता
2. शब्दों की शुद्ध प्रयोग,
~श्लेषः
शब्दों में अनेकार्थता, द्व्यर्थकता (यह अलङ्कार 'अर्थश्लेष' से इसलिए भिन्न है कि इसके संघटक शब्दों को हटाकर समानार्थक शब्दों को रख देने मात्र से श्लिष्टता नष्ट हो जाती है' जबकि 'अर्थश्लेष' अपरिवर्तित ही रहता है –शब्दपरिवृत्ति सहत्वमर्थश्लेषः),
~संग्रहः
शब्दकोश, शब्दावली,
~सौष्ठवम्
शब्दों का लालित्य, ललित और शैली
~सौकर्यम्
अभिव्यक्ति की सरलता ।


शब्दः [शब्द+घञ्]


1. आवाज़ (श्रुति विषय और आकाश का गुण)
2. ध्वनि, रव (पक्षियों या विभिन्न प्राणियों का)
3. पद, सार्थक शब्द
4. व्याकरण
5. ख्याति लब्धशब्देन कौसल्ये–रा० २ ।६३।११
6. पुनीत प्रणव (ओम्) ।
समस्त पद
~अक्षरम्
पुनीत प्रणव,
~इन्द्रियम्
कान,
~गोचरः
1. वाणी का विषय
2. श्रव्य,
~वैलक्षण्यम्
शाब्दिक भिन्नता,
~संज्ञा
व्याकरण का एक पारिभाषिक शब्द, –पा० १।१६८,
~स्मृतिः
(स्त्री०)भाषा विज्ञान ।

परिशिष्ट



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