संस्कृत-शब्दकोशः

शरिमन् शरीरक

शरीर

शरीरम् [शृ+ईरन्]


(जड चेतन पदार्थों की) काया, देह, –शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् –कु० ५।३३
2. संघटक तत्त्व–काव्या० १।१०
3. दैहिक शक्ति
4. मृत शरीर, शव ।
समस्त पद
~अन्तरम्
1. शरीर का आन्तरिक भाग
2. दूसरा शरीर,
~आवरणम्
1. खाल, चमड़ी,
~कर्तृ
(पुं०) पिता,
~कर्षणम्
शरीर की कृशता,
~जः
1. रोग
2. काम, प्रणयोन्माद
3. कामदेव
4. पुत्र, सन्तान–कि० ४।३१,
~तुल्य
(वि०) समान अर्थात् उतना प्रिय जितना अपना शरीर,
~दण्डः
1. शारीरिक दंड
2. कार्य-साधना (जैसा की तपस्या में),
~धृक्
(वि०) शरीरधारी,
~पतनम्, ~पातः
मृत्यु, मौत,
~पाकः
(शरीर की) कृशता,
~बद्ध
(वि०) शरीर से युक्त, शरीरधारी, शरीरी–कु० ५।३०,
~बन्धः
1. शारीरिक ढांचा रघु० १६।२३
2. शरीर से युक्त होना अर्थात् शरीरधारी प्राणी का जन्म–रघु० १३।१५८,
~बन्धकः
सशरीर प्रतिभू,
~भाज्
(वि०) शरीरधारी, शरीरी (पुं०) जन्तु, शरीरधारी प्राणी,
~भेदः
(आत्मा से) शरीर का वियोग, मृत्यु,
~यष्टिः
(स्त्री०) पतला शरीर, सुकुमार, दुबलापतला,
~यात्रा
आजीविका,
~विमोक्षणम्
आत्मा का शरीर से छुटकारा, मुक्ति,
~वृत्तिः
(स्त्री०) शरीर का पालनपोषण–रघु० २।४५,
~वैकल्यम्
शारीरिक रोग, बीमारी, व्याधि,
~शुश्रूषा
व्यक्तिगत सेवा,
~संस्कारः
1. व्यक्ति की सजावट
2. नाना प्रकार के शुद्धिसंस्कारों के अनुष्ठान द्वारा शरीर को निर्मल करना,
~संपत्तिः
(स्त्री०) शरीर की समृद्धि, (अच्छा) स्वास्थ्य,
~पादः
शरीर की दुर्बलता, कृशता–रघु० ३।२,
~स्थितिः
(स्त्री०)
1. शरीर का पालन-पोषण –रघु० ५।९
2. भोजन करना, खाना (का० में बहुधा प्रयुक्त) ।



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