शल्यम् [शल्+यत्]
1. वर्छी, नेजा, सांग
2. बाण, तीर, शल्यं निखातमुदहारयतामुरस्त: –रघु० ९।७८, शल्यप्रोतम् –९।७५, श० ६।९
3. काँटा, खपची
4. मेख, खूँटी, थूणी (उपर्युक्त चारों अर्थों में पुं० भी होता है)
5. शरीर में घुसा हुआ कोई पीड़ा कारक काँटा आदि अलातशल्यम्–उत्तर० ३।३५
6. (अलं०) हृदयविदारक शोक या किसी तीक्ष्ण पीड़ा का कारण –उद्धृतविषादशल्यः कथयिष्यामि–श० ७
7. हड्डी
8. कठिनाई, कष्ट
9. पाप, जुर्म
10. विष,
~ल्यः
1. साही, झाऊ चूहा
2. काँटेदार झाडी
3. (आयु० में) शल्यचिकित्सा में खपचियों का उखेड़ना
4. बाड़, सीमा
5. एक प्रकार की मछली
6. मद्रदेश का राजा, पांडु की द्वितीय पत्नी माद्री का भाई, नकुल और सहदेव का मामा ( महाभारत के युद्ध में उसने पांडवो की ओर से लड़ने का विचार किया परन्तु दुर्योधन ने चालाकी से उस पर प्रभाव डाल कर उसे अपनी ओर कर लिया, अन्ततः वह कौरवों की ओर से लड़ा । कर्ण के सेनापति बनने पर वह उसका सारथि बना, और कर्ण की मृत्यु हो जाने पर उसे कौरव सेना का सेनापतित्व मिला । एक दिन तक उसने सेनापतित्व का भार संभाला, परन्तु दूसरे दिन युधिष्टिर ने उसे मौत के घाट उतार दिया) ।
समस्त पद
~अरिः
युधिष्ठिर का विशेषण,
~आहरणम्, ~उद्धरणम्, ~उद्धारः, ~क्रिया, ~शास्त्रम्
कांटा या फांस आदि निकालना, शल्यशास्त्र का वह भाग जो शरीर से असंगत सामग्री को उखाड फेंकने से संबंध रखता है,
~कण्ठः
झाऊ चूहा,
~लोमन्
(नपुं०) साही का काँटा,
~हर्तृ
(पुं०) निरैया, निराने वाला ।