शीलः [शील्+अच्]
अजगर,
~लम्
1. स्वभाव, प्रकृति, चरित्र, प्रवृत्ति, रुचि, आदत, प्रथा –समानशीलव्यसनेषु सख्यम् –सुभा०, 'अनुसक्त' 'दुर्व्यस्त' 'प्रवण' 'लीन' 'अभ्यास' आदि अर्थ प्रकट करने के लिए बहुधा समास के अन्त में प्रयुक्त, ‘कलहशील’ 'कलह करने के स्वभाव वाला' ‘झगड़ालू' ‘भावनशील’ चिन्तनशील, इसी प्रकार दान°,
मृगया°, दया°, पुण्य°, आश्वासन° आदि
2. आचरण, व्यवहार
3. अच्छा स्वभाव, अच्छी प्रकृति – शीलं परं भूषणम् –भर्तृ० २।८२ पंच० ५।२
4. सद्गुण, नैतिकता, सदाचरण, सज्जीवन, शुचिता, ईमानदारी–दौर्मन्त्र्यान्नृपतिर्विनश्यति..... शीलं खलोपासनात् –भर्तृ० २४२, ३९, तथा हि ते शीलमुदारदर्शने तपस्विनामप्युपदेशतां गतम्–कु० ५।३६, कि० ११।२५, रघु० १०।७०
5. सौन्दर्य, सुन्दर रूप ।
समस्त पद
~खण्डनम्
शुचिता या नैतिकता का उल्लंघन–पंच० १,
~धारिन्
(पुं०) शिव का विशेषण,
~वंचना
शुचिता का उल्लंघन, प्राप्तेयं शीलवंचना–मृच्छ० १।४४ ।