संस्कृत-शब्दकोशः

शुतुद्रु शुद्धि

शुद्ध

शुद्ध (भू० क० कृ०) [शुध् + क्त]


1. विशुद्ध, विमल, पवित्रीकृत–अन्त: शुद्धस्त्वमपि भविता वर्णमात्रेण कृष्ण: –मेघ० ४९
2. पुनीत, अकलुषित, शुचि, निर्दोष –अन्वमीयत शुद्धेति शान्तेन वपुषैव सा – रघु० १५।७७, १४।१४
3. श्वेत, उज्ज्वल
4. निष्कलंक, वेदाग
5. भोला-भाला, सीधा-सादा, निर्दोष
6. ईमानदार, खरा
7. सही, अशुद्धिरहित, यथार्थ
8. ऋण चुकाया गया, क़र्ज़ अदा किया गया
9. केवल, मात्र
10. सरल, विशुद्ध, अनमिश्रित, (विप० ‘मिश्र’)
11. अद्वितीय
12. अधिकृत
13. पैनाया हुआ, तेज़ किया हुआ
14. अननुनासिक,
~द्धः
शिव का विशेषण,
~द्धम्
1. कोई भी विशुद्ध वस्तु
2. विशुद्ध सुरा
3. सेंधा नमक
4. काली मिर्च ।
समस्त पद
~अन्तः
राजा का अन्तःपुर, रनवास, अन्दर महल–शुद्धान्तदुर्लभमिदं वपुराश्रमवासिनो यदि जनस्य–श० १।१७, कु० ६।५२,
°चारिन्
(पुं०) अन्तःपुर का सेवक, कंचुकी –उत्तर० १,
°पालकः, °रक्षक
अन्तःपुर का रखवाला,
~आत्मन्
(वि०) शुद्धात्मा, ईमानदार
~ओदनः
(‘शुद्धोदनः’) विख्यात बुद्ध का पिता
°सुतः
बुद्ध,
~चैतन्यम्
विशुद्ध, प्रतिभा, प्रज्ञा,
~जंघः
गधा,
~धी, ~भाव, ~मति
(वि०) विशुद्धमना, निर्दोष, ईमानदार ।


शुद्ध (वि०) [शुध्+क्त]


1. जांचा हुआ, आजमाया हुआ, परीक्षित
2. पवित्र, निष्कलंक
3. ईमानदार, धर्मात्मा
4. विशुद्ध, खालिस जिसमें कुछ मिलावट न हो (विप० मिश्र) ।
समस्त पद
~अद्वैतम्
अद्वैत की वह स्थिति जहाँ कि जीव और ईश्वर का सायुज्य मायारहित माना जाता है,
~बोध
(बि०) (वेदान्त०) विशुद्ध ज्ञान से युक्त,
~भाव
(वि०) पवित्र मन वाला,
~विष्कम्भकः
नाटक का वह भाग जहाँ केवल संस्कृत बोलने वाले पात्र ही दिखाई दें ।

परिशिष्ट



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