शुश्रूषा [श्रु+सन्, द्वित्वादि+अ+टाप्]
1. सुनने की इच्छा –अत एव शुश्रूषा मां मुखरयति – मुद्रा० ३2. सेवा, टहल3. कर्तव्यपरायणता, आज्ञाकारिता4. सम्मान5. बोलना, कहना ।