शुश्रूषणा
शुश्रूषाध्यक्षा
शुश्रूषा
शुश्रूषा (स्त्रीलिङ्ग)
निष्पत्ति− शृ (श्रवणे) + सन् - "अः" (३-३-१०२)
प्रयोग− "तस्मै शशंस पणिपत्य नन्दी शुश्रूषया शैलसुतामुपेताम्"
उल्लेख− कुमा० ३-६०
अर्थ−
१. सेवा,
२. सुन्ने इच्छा,
३. सम्मान,
४. रोगीको सेवा,
५. खुसामद,
६. कथन/भनाइ,
७. प्रार्थना,
८. सम्मान ।