शुष्क (भू० क० कृ०) [शुष्+क्त]
1. सूखा, सुखाया हुआ –शाखायां शुष्कं करिष्यामि–मृच्छ० ८
2. भुना हुआ, म्लान
3. झुर्रीदार, सिकुड़न वाला, कृश
4. झूठ मूठ, व्याजमुक्त, नक़ली –कामिन: स्म कुरुते करभोरूर्हारि शुष्करुदितं च सुखेऽपि –शि० १०।६९
5. रिक्त, व्यर्थ, अनुपयोगी, अनुत्पादक–मालवि० २
6. निराधार, निष्कारण
7. बुरा लगने वाला, कठोर –तस्मै नाकुशलं ब्रूयान्न शुष्कां गिरमीरयेत् – मनु० ११।३५ ।
समस्त पद
अङ्ग
(वि०) कृशकाय,
(–गी)
छिपकली,
~अन्नम्
वह अनाज जिसमें से भूसा अलग नहीं किया गया,
~कलहः
1. व्यर्थ या निराधार झगड़ा
2. बनावटी झगड़ा–मुद्रा० ३,
~वैरम्
निराधार वैर,
~व्रण
वह घाव जो अच्छा हो गया है, घाव का चिह्न ।