संस्कृत-शब्दकोशः

शूकल शूद्रक

शूद्र

शूद्रः [शुच्+रक्, पृषो० चस्य दः, दीर्घः]


चौथे वर्ण का पुरुष, हिन्दुओं के चार मुख्य वर्णों में से अन्तिम वर्ण का पुरुष (कहा जाता है कि वह 'पुरुष या ब्रह्मा' के पैरों से उत्पन्न हुआ—पद्भयां शूद्रो अजायत –ऋक्० १०।९०।१२, मनु० १।८७, उसका मुख्य कर्तव्य तीनों उच्चवर्णों की सेवा करना है – तु० मनु० १।९१) ।
समस्त पद
~आह्निकम्
शूद्र का दैनिक अनुष्ठान,
~उदकम्
शूद्र के स्पर्श से दूषित जल,
~कृत्यम्, ~धर्मः
शूद्र का कर्तव्य,
~प्रियः
प्याज,
~प्रेष्यः
तीनों उच्चवर्णो में से किसी एक वर्णका पुरुष जो शूद्र का सेवक हो
~भूयिष्ठ
(वि०) जहाँ अधिकांश शूद्र रहते हों,
~याजकः
जो शूद्र के लिए यज्ञ का संचालन करता है,
~वर्गः
शूद्रश्रेणी या सेवकवर्ग,
~सेवनम्
शूद्र की सेवा करना, शूद्र का सेवक बनना ।


शूद्रः [शुच्+रक्, पृषो० चस्य दः दीर्घश्च]


हिन्दु समाजमें चौथे वर्ण का पुरुष (कहा जाता है कि वह पुरुष के पैरों से उत्पन्न हुआ –पद्भ्यां शूद्रोऽजायत –ऋ० १०।९०।१२ ।
समस्त पद
~अन्नम्
शूद्र द्वारा दिया गया या परोसा गया भोजन,
~घ्न
(वि०) शूद्रकी हत्या करने वाला,
~वृत्तिः
शूद्र का व्यवसाय,
~संस्पर्शः
शूद्र से छू जाना ।

परिशिष्ट



Correction: