शून्य (वि०) [शूनायै प्राणिवधाय हितं रहस्यस्थानत्वात् यत्]
1. रिक्त, खाली
2. सूना (हृदय, तथा चितवन आदि के लिए भी प्रयुक्त) –गमनमलसं शून्या दृष्टि: –मा० १।१७ दे० नी० शून्यहृदय
3. अविद्यमान
4. एकान्त, निर्जन, विविक्त, वीरान–शून्येषु शूरा न के –काव्य० ७, भट्टि० ६।९, उत्तर० ३।३८, मा० ९।२०
5. खिन्न, उदास, उत्साहहीन –शून्या जगाम भवनाभिमुखी कथंचित्–कु० ३।७५, कि० १७।३९
8. नितान्त रहित, वञ्चित, विहीन, अभावयुक्त (करण० के साथ या समास में) –अंगुलीयकशून्या में अंगुलि:–श० ५, दया° ज्ञान° आदि
7. तटस्थ
8. निर्दोष
9. अर्थहीन, निरर्थक –शि० ११।४
10. विवस्त्र, नंगा,
~न्यम्
1. निर्वातता, रिक्त, खोखलापन
2. आकाश, अन्तरिक्ष
3. सिफर, बिन्दु
4. अस्तिस्वहीनता, (पूर्ण, असीम) अविद्यमानता–दूषण शून्य बिन्दव: –नै० १।२१ ।
समस्त पद
~मध्यः
खोखला नरकुल,
~मनस्, ~मनस्क
(वि०) अन्यमनस्क, भग्नचेता,
~मुख, ~वदन
(वि०) हक्का-बक्का, उदास, किंकर्तव्यविमूढ,
~वादः
वह दार्शनिक सिद्धांत जो (जीव ईश्वर आदि) किसी भी पदार्थ की सत्ता स्वीकार नहीं करता, बौद्ध दर्शन,
~वादिन्
(पुं०)
1. नास्तिक
2. बौद्ध,
~हृदय
(वि०)
1. अन्यमनस्क –विक्रम० २, श० ४
2. खुले दिल वाला, जो दूसरों पर किसी प्रकार का संदेह न करें ।