संस्कृत-शब्दकोशः

श्रिष् श्रीमत्

श्री

श्री (क्र्या० उभ० श्रीणाति, श्रीणीते) पकाना, भोजन बनाना, उबालना, तैयार करना ।


श्री (स्त्री०) [श्रि+क्विप्, नि०]


1. धन, दौलत, प्राचुर्य, समृद्धि, पुष्कलता –अनिर्वेदः श्रियो मूलम् –रामा०, साहसे श्रीः प्रतिवसति– मृच्छ० ४ 'सौभाग्य वीरों पर अनुग्रह करता है'–मनु० ९।३००
2. राजसत्ता, ऐश्वर्य, राजकीय धनदौलत–कि० १।१
3. गौरव महिमा, प्रतिष्ठा–श्रीलक्षण – कु० ७ ।४६, अर्थात् महिमा या गौरव का चिह्न
4. सौन्दर्य, चारुता, लालित्य, कान्ति –(मुखं) कमलश्रियं दधौ –कु० ५।२१, ७।३२, रघु० ३।८, कि० १।७५
5. रंग, रूप, कु० २।२
6. विष्णु की पत्नी लक्ष्मी जो धन की देवी है,–आसीदियं दशरथस्य गृहे यथा श्रीः–उत्तर० ४।६, २० ३।१४, शि० १।१
7. गुण, श्रेष्ठता
8. सजावट
9. बुद्धि, समझ
10. अतिमानव शक्ति
11. मानवजीवन के तीन उद्देश्यों की समष्टि (धर्म, अर्थ, और काम)
12. सरल वृक्ष
13. बेल का पेड़
14. हींग
15. कमल ('श्री' शब्द सम्मान सूचक पद है जो पूज्य व्यक्तियों तथा देवों के नामों के पूर्व लगाया जाता है–श्रीकृष्णः, श्रीरामः, श्री वाल्मीकिः, श्रीजयदेवः, कुछ प्रसिद्ध ग्रन्थों के पूर्व भी जिनका विषय धार्मिक है–श्रीभागवत, श्रीरामायण आदि, किसी पाण्डुलिपि या पत्रादिक के आरम्भ में भी मंगलाचरण के रूप में प्रयुक्त होता है; माघ ने अपने 'शिशुपालवध' काव्य के प्रत्येक सर्ग के अन्तिम श्लोक में इस शब्द का प्रयोग किया है, जिस प्रकार भारवि ने 'लक्ष्मी' शब्द का प्रयोग किया है) ।
समस्त पद
~आह्वम्
कमल,
~ईशः
विष्णु का विशेषण
~कण्ठः
1. शिव का विशेषण
2. भवभूति कवि का विशेषण– श्रीकण्ठपदलाञ्छनः–उत्तर० १,
~सखः
कुबेर का विशेषण,
~करः
विष्णु का विशेषण
(–रम्)
लाल कमल,
~करणम्
लेखनी,
~कान्तः
विष्णु का विशेषण,
~कारिन्
(पुं०) एक प्रकार का बारहसिंगा,
~खण्डः, –डम्
चन्दन की लकड़ी –श्रीखण्डविलेपनं सुखयति–हि० १।९७,
~गदितम्
एक प्रकार का छोटा नाटक,
~गर्भः
1. विष्णु का विशेषण
2. तलवार,
~ग्रहः
पक्षियों को पानी पिलाने की कुण्डी,
~घनम्
खट्टी दही,
(–नः)
बौद्ध महात्मा,
~चक्रम्
1. भूवृत्त, भूमण्डल
2. इन्द्र के रथ का पहिया,
~जः
काम का विशेषण,
~दः
कुबेर का विशेषण,
दयितः, ~धरः
विष्णु के विशेषण,
~नगरम्
एक नगर का नाम
~नन्दनः
राम का विशेषण,
~निकेतनः, ~निवासः
विष्णु के विशेषण,
~पतिः
1. विष्णु का विशेषण –शि० १३।६९
2. राजा, प्रभु,
~पथः
मुख्य सड़क, राजमार्ग,
~पर्णम्
कमल,
~पर्वतः
एक पहाड़ का नाम –मा० १,
~पिष्टः
तारपीन,
~पुष्पम्
लौंग,
~फल:
बेल का पेड़
(–लम्)
बेल का फल,
~फला, ~फली
1. नील का पौधा
2. आमलकी, आँवला,
~भ्रातृ
(पुं०)
1. चाँद
2. घोड़ा,
~मस्तकः
लहसुन,
~मुद्रा
वैष्णवों का विशेष तिलक जो मस्तक पर लगाया जाता है,
~मूर्तिः
(स्त्री०)
1. विष्णु या लक्ष्मी की प्रतिमा
2. कोई भी प्रतिमा,
~युक्त, ~युत
1. सौभाग्यशाली, प्रसन्न
2. धनवान्, समृद्धिशाली (प्रायः पुरुषों के नामों के पूर्व लगाया जाने वाला सम्मान सूचक पद,
~रङ्गः
विष्णु का विशेषण,
~रस:
1. तारपीन
2. राल,
~वत्सः
1. विष्णु का विशेषण, विष्णु की छाती पर बालों का घूंघर या चिह्नविशेष–प्रभानुलिप्तश्रीवत्सं लक्ष्मीविभ्रमदर्पणम् –रघु० १०।१०,
°अङ्कः, °धारिन्, °भृत्, °लक्ष्मन्, °लाञ्छन (पुं०) विष्णु के विशेषण– कु० ७।४३,
~वत्सकिन्
(पुं०) एक घोड़ा जिसकी छाती पर बालों का घूंघर होता है,
~वरः, ~वल्लभः
विष्णु के विशेषण,
~वल्लभः
लक्ष्मी का प्रिय, सौभाग्यशाली या सुखी व्यक्ति,
~वासः
1. विष्णु का विशेषण
2. शिवका विशेषण
3. कमल
4. तारपीन,
~वासस्
( पुं० ) तारपीन,
~वृक्षः
1. बेल का पेड़
2. अश्वत्थवृक्ष
3. घोड़े के मस्तक और छाती पर बालों का घूंघर,
~वेष्टः
1. तारपीन
2. राल,
~संज्ञम्
लौंग,
~सहोदरः
चन्द्रमा,
~सूक्तम्
एक वैदिक सूक्त का नाम,
~हरिः
विष्णु का विशेषण,
~हस्तिनी
सूर्यमुखी फूल का पौधा ।


श्री [श्रि+क्विप्, नि० दीर्घः]


वेदत्रयी, तीनों वेद ।

परिशिष्ट



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