श्रेणि (पुं०, स्त्री०) [श्रि+णि]
1. रेखा, शृंखला, पंक्ति, –तरङ्गभ्रूभङ्गा क्षुभितविहगश्रेणिरसना–वेणी० ४।२८, न षट्पदश्रेणिभिरेव पङ्कजं सशंदलासङ्गमपि प्रकाशते–कु० ५।९, मेघ० २८, ३५
2. दल, संचय, समूह– उत्तर० ४
3. व्यापारियों का संघ, शिल्पियों का संघटन, निगम
4. बोक्का, बालटी ।
समस्त पद
~धर्माः
(प०, ब० व०) व्यापारिवर्ग या शिल्पकार-संघों के नियम, रीतियाँ आदि ।