श्लथ (वि०) [श्लथ्+अच्]
1. बिना बँधा, बिना जकड़ा
2. शिथिल, विश्रांत, खुला हुआ, फिसला हुआ –वृन्ताच्छ्लथं हरति पुष्पमनोकहानाम् – रघु० ५।३७, १९।२६
3. बिखरे हुए (जैसे बाल) ।
समस्त पद
~उद्यम
(वि०) जिसने अपने प्रयत्न ढीले कर दिये हों,
~लम्विन्
(वि०) ढीला-ढाला, नीचे लटकता हुआ, –कु० ५।४७ ।