षण्ढः [सन् +ढ, पृषो० षत्वम्]
1. नपुंसक, हिजड़ा, –याज्ञ० १।२१५2. नपुंसकलिंग –निवेश: शिविरं षण्ढे–अमर० ।समस्त पद~तिलः बंध्य तिल, वह तिल जो उग न सके ।