मृश् (तुदा० पर० मृशति, मृष्ट)
1. स्पर्श करना, हाथ से पकड़ना
2. मलना, गुदगुदाना
3. सोचना, विमर्श, विचार करना,
अभि–
स्पर्श करना, हाथ से पकड़ना,
आ–
स्पर्श करना, हाथ लगाना, हाथ डालना (आलं० से भी); नवातपामृष्टसरोजचारुभि:–कि० ४।१४, शरांसनज्यां मुहुराममर्श – कु० ३।६४; शि० ९।३४
2. झमट्टा मारना, खा जाना–रघु० ५।९
3. आक्रमण करना, हमला करना; आमृष्टं नः पदं परैः–कु० २।३१,
परा–
1. स्पर्श करना, मलना. गदगुदाना; परामृशत् हर्षजडेन पाणिना तदीयमङ्गं कुलिशब्रणाङ्कितम् –रघु० ३।६८, शि० १७।११, मृच्छ० ५।२८
2. किसी पर हाथ डालना, आक्रमण करना, हमला करना, पकड़ लेना–मृच्छ० १।३९.
3. दूषित करना, भ्रष्ट करना, बलात्कार करना, विचार विमर्श करना, चिंतन करना–किं भवितेति सशङ्कं पङ्कजनयना परामृशति–भामि० २।५३
5. मन से सोचना, प्रशंसा करना –ग्रन्थारम्भे विघ्नविघाताय समुचितेष्टदेवतां ग्रन्थकृत्परामृशति–काव्य० १,
परि–
1. स्पर्श करना, जरा छू जाना–शिखरशतैः परिमृष्टदेवलोकम्–भट्टि० १०।४५
2. ज्ञात करना,
वि–
1. स्पर्श करना
2. चिन्तन करना, सोचना, विचार करना, मनन करना–वृणुते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वमेव संपदः –कि० २।३०, रामप्रवासे व्यमृशन्न दोषं जनापवादं सनरेन्द्रमृत्युम्–भट्टि० ३।७, १२।२४, कु० ६।८७, भग० १८।६३
3. प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त करना, पर्यवेक्षण करना
4. परीक्षा लेना, परीक्षण करना–तदत्रभवानिमं मां च शास्त्रे प्रयोगे च विमृशतु–मालवि० १ ।