मेरुः [मि+रु]
उपाख्यानों में वर्णित एक पर्वत का नाम (ऐसा माना जाता है कि समस्त ग्रह इसके चारों ओर घूमते हैं, यह भी कहते हैं कि मेरु सोने और रत्नों से भरा हुआ है)–विभज्य मेरुर्न यदर्थिसात्कृतः –नै० १।१६, स्वात्मन्येव समाप्तहेममहिमा मेरुर्न मे रोचते –भर्तृ० ३।१५१
2. रुद्राक्षमाला के बीच का गुरिया
3. हार के बीच की मणि ।
समस्त पद
~धामन्
(पुं०) शिव का विशेषण,
~यन्त्रम्
तकुवे के आकार की बनी एक आकृति ।