मोक्षः [मोक्ष्+घञ्]
1. मुक्ति, छुटकारा, बचाव, स्वतंत्रता –साऽधुना तव बन्धे मोक्षे च प्रभवति –का०; मेघ० ६१, लब्धमोक्षाः शुकादयः– रघु० १७।२० धुर्याणां च धुरो मोक्षम्–१७।१९,
2. उद्धार, परित्राण, मोचन
3. परममुक्ति, आवागमन अर्थात् पुनर्जन्म के चक्कर से आत्मा की मुक्ति, मानवजीवन के चार उद्देश्यों में से अन्तिम दे० अर्थ, भग० ५।२८, १८।३०, रघु० १०।८४, मनु० ६।३५
4. मृत्यु,
5. अधःपतन, अवपतन, गिरना–वनस्थलीर्मर्मरपत्रमोक्षा:–कु० ३।३१
6. ढीला करना, खोलना, बन्धनमुक्त करना –वेणिमोक्षोत्सुकानि– मेघ० ९९
7. ढलकाना, गिराना, बहाना–बाष्पमोक्ष, अश्रुमोक्ष
8. निशाना लगाना, फेंकना, दागना बाणमोक्षः श० ३।५
9. बखेरना, छितराना
10. (किसी ऋण आदि का) परिशोध करना
11. (ज्योतिष् में) ग्रहणग्रस्त ग्रह की मुक्ति ।
समस्त पद
~उपायः
मोक्ष प्राप्त करने का साधन
~देवः
प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्यूनत्सांग के साथ व्यवहृत होने वाला विशेषण,
~द्वारम्
सूर्य,
~पुरी
कांची नामक नगरी का विशेषण ।