रतिः (स्त्री०) [रम्+क्तिन्]
1. आनन्द, खुशी, सन्तोष, हर्ष –श० २।१
2. स्नेहशीलता, भक्ति, अनुराग, आनन्दानुभूति (अधि० के साथ) –पापे रतिं मा कृथाः –भर्तृ० २।७७, स्वयोषिति रतिः–२।६२, रघु० १।२३ कु० ५।६५
3. प्रेम, स्नेह, सा० द० द्वारा की गई परिभाषा–रतिर्मनोऽनुकूलेऽर्थे मनसः प्रवणायितम् –२०७, तु० २०६ से भी
4. सम्भोग का आनन्द –दाक्षिण्योदकवाहिनी विगलिता याता स्वदेशं रतिः –मृच्छ० ८।३८, इसी प्रकार 'रतिसर्वस्वम्' दे० नी०
5. मैथुन, संभोग, सहवास
6. रतिदेवी, कामदेव की पत्नी –साक्षात्कामं नवमिव रतिर्मालती माधवं यत् –मा० १।१६, कु० २।२३, ४।४५, रघु० ६।२
7. योनि, भग ।
समस्त पद
~अंगम्, ~कुहरंम्
योनि, भग,
~गृहम्, ~भवनम्, ~मन्दिरम्
1. क्रीडा गृह
2. चकला, रंडीखाना
3. योनि, भग,
~तस्करः
फुसलाने वाला. व्यभिचारी,
~दूतिः, –ती
(स्त्री०) प्रेम का संदेश ले जाने वाली–कु० ४।१६,
~पतिः, ~प्रिय, ~रमणः
कामदेव, –अपि नाम मनागवतीर्णोऽसि रतिरमणबाणगोचरम् –मा० १, दधति स्फुटं रतिपतेरिषवः शिततां यदुत्पलपलाशदृशः –शि० ९।६६,
~रसः
संभोग का आनन्द,
~लंपट
(वि०) कामी, कामासक्त, कामुक,
~सर्वस्वम्
रतिक्रीडा का अत्युत्तम रस, अत्यानन्द –करं व्याधुन्वत्याः पिबसि रतिसर्वस्वमधरम् –श० १।२४ ।
रतिः [रम्+क्तिन्]
1. हर्ष, आह्लाद
2. आसक्ति, अनुराग
3. यौनसुख
4. संभोग, मैथुन
5. कामदेव की पत्नी
6. चन्द्रमा की छठी कला ।
समस्त पद
~खेदः
मैथुन करने से उत्पन्न थकावट,
~पाशः, ~बन्धः
मैथुन करने की विशिष्ट रीति,
~रहस्यम्
कोक्कोक पंडित द्वारा प्रणीत कामशास्त्र',
~सुन्दरः
एक प्रकार का रतिबंध ।
परिशिष्ट