संस्कृत-शब्दकोशः

रंहस् रहस्यत्रय

रहस्य

रहस्य (वि०) [रहसि भवः–यत्]


1. गुप्त, निजी, प्रच्छन्न
2. भेदभरा,
~स्यम्
1. भेद (आलं० से भी) –स्वयं रहस्यभेदः कृतः–विक्रम० २
2. रहस्य से भरा जादू, मंत्र, (अस्त्रसंबंधी) भेद, गुप्त बात –सरहस्यानि जृम्भकास्त्राणि –उत्तर० १
3. आचरण का भेद या रहस्य, गुप्त बात–रहस्यं साधूनामनुपधि विशुद्धं विजयते –उत्तर० २।२
4. गुह्य या गोपनीय शिक्षा, एक रहस्यमय सिद्धान्त–भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम् –भग० ४।३, मनु, २।१५०
(अव्य० –स्यम्)
चुपचाप, गुप्तरूप से याज्ञ० ३।३०१ (यहाँ यह विशेषण के रूप में भी समझा जा सकता है) ।
समस्त पद
~आख्यायिन्
(वि०) भेद की बात बताने वाला–रहस्याख्यायीव स्वनसि मृदु कर्णान्तिकचरः –श० १।२४,
~भेदः, ~विभेदः
किसी भेद या गुप्त बात का खोलना,
~व्रतम्
1. गुप्त प्रतिज्ञा.या साधना
2. जादू के शस्त्रास्त्रों पर अधिकार प्राप्त करने के लिए एक रहस्यमय विज्ञान ।



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