रु (अदा० पर० रौति, रवीति, रुत) क्रंदन करना, हुहू करना, चिल्लाना, चीखना, जोर से बोलना, दहाड़ना (मक्खियों का) भनभनाना, शब्द करना– कर्णे कलं किमपि रौति शनैर्विचित्रम्–हि० १।८१, भट्टि० ३।१७, १२।७२, १४।२१,
वि–
1.क्रन्दन करना, विलाप करना शोक में रोना–ननु सहचरी दूरे मत्वा विरौषि समुत्सुकः–विक्रम० ४।२०, भट्टि० ५।५४, ऋतु० ६।२७,
2. कोलाहल करना, शोर मचाना–न स विरौति न चापि स शोभते–पंच० १।७५, जीर्णत्वाद् गृहस्य विरौति कपाट:–मृच्छ० ३, एते त एव गिरयो विरुवन्मयूरा:–उत्तर० २।२३ ।