संस्कृत-शब्दकोशः

लक्षक लक्षणा

लक्षण

लक्षणम् [लक्ष्यतेऽनेन–लक्ष् करणे ल्युट्]


1. चिह्न, निशानी, निशान, संकेत, विशेषता, भेद बोधक चिह्न,–वधूदुकूलं कलहंसलक्षणम्–कु० ५।०७, अनारंभो हि कार्याणां प्रथमं बुद्धिलक्षणम्–सुभा० अव्याक्षेपो भविष्यन्त्याः कार्यसिद्धेर्हि लक्षणम्–रघु० १०।६, १९।४७, गर्भलक्षण –श० ५, पुरुषलक्षणम्, वीर्यवत्ता का चिह्न या पुंस्त्वद्योतक इन्द्रिय
2. (रोग का) लक्षण
3. विशेषण, खूबी
4. परिभाषा, यथार्थ वर्णन
5. शरीर पर भाग्यसूचक चिह्न (यह गिनती में ३२ हैं)–द्वात्रिंशल्लक्षणोपेतः
6. (शुभाशुभ भाग्य का सूचक) शरीर पर बना कोई चिह्न –क्व तद्विधस्त्वं क्व च पुण्यलक्षणा –कु० ५।३७, क्लेशावहा भर्तुरलक्षणाहम्–रघु० १४।५
7. नाम, पद, अभिधान (प्राय: समास के अन्त में) –विदिशालक्षणां राजधानीम् –मेघ० २५, नै० २२।४१
8. श्रेष्ठता उत्कर्ष, अच्छाई जैसा कि 'आहितलक्षण' –रघु० ६।७१ में (यहाँ मल्लि० इस शब्द का अनुवाद करता है 'प्रख्यातगुण' और अमर० का उद्धरण–गुणैः प्रतीते तु कृतलक्षणाहितलक्षणौ–देता है)
9. उद्देश्य, क्रियाक्षेत्र या लक्ष्य, ध्येय
10. (कर आदि का) निश्चित भाव–मनु० ८।४०५
11. रूप, प्रकार प्रकृति
12. कर्तव्यनिर्वाह, कार्यप्रणाली
13. कारण, हेतु
14. सिर, शीर्षक, विषय
15. बहाना, छद्मवेश (=लक्ष) –प्रसुप्तलक्षण: –मनु० ७,
~णः
सारस,
~णा
1. उद्देश्य, ध्येय
2. (अलं० में) शब्द का परोक्षप्रयोग या गौण सार्थकता, शब्द की एक शक्ति, इसकी परिभाषा इस प्रकार है –मुख्यार्थवाधे तद्योगे रूढितोऽर्थप्रयोजनात्, अन्योऽर्थो लक्ष्यते यत्सा लक्षणारोपितक्रिया: –काव्य० २, दे० सा० द० १३ भी
3. हंस ।
समस्त पद
~अन्वित
(वि०) शुभलक्षणों से युक्त,
~ज्ञ
(वि०) (शरीर पर विद्यमान) चिह्नों की व्याख्या करने में सक्षम,
~भ्रष्ट
(वि०) अभागा, दुर्भाग्यग्रस्त,
~लक्षणा
=जहल्लक्षणा, दे०,
~संनिपातः
दाग लगाना, कलंकित करना ।


लक्षणम् [लक्ष्+ल्युट्]


1. चिह्न, संकेतक, टोकन
2. परिभाषा
3. शरीर पर सौभाग्यशाली चिह्न
4 नाम
5. उद्देश्य
6. मैथुनेन्द्रिय ।
समस्त पद
~कर्मन्
(नपुं०)परिभाषा ।

परिशिष्ट



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