संस्कृत-शब्दकोशः

लक्षितलक्षणा लक्ष्मण

लक्ष्

लक्ष्
i (भ्वा० आ० लक्षते, लक्षित) प्रत्यक्ष करना, समझना, अवलोकन करना, देखना ।
ii (चुरा० उभ० लक्षयति ते, लक्षित)
1. देखना, अवलोकन करना, निरखना, ज्ञात करना, प्रत्यक्ष करना–आर्यपुत्रः शून्यहृदय इव लक्ष्यते –बिक्रम० २, रघु० ९।७२, १६।७
2. चिह्न लगाना, प्रकट करना, चरित्रचित्रण करना, संकेत करना –सर्वभूतप्रसूतिर्हि बीजलक्षणलक्षिता–मनु० ९।३५
3. परिभाषा करना–इदानीं कारणं लक्षयति–आदि
4. गौण रूप से संकेत करना, गौण अर्थ में सार्थक करना –यथा गंगा शब्दः स्रोतसि सवाध इति तटं लक्षयति तद्वत् यदि तटेऽपि सवाधः स्यात्तत्प्रयोजनं लक्षयेत् –काव्य० २, अत्र गोशब्दो वाहीकार्थं लक्षयति –सा० द० २
5. लक्ष्य करना
6. खयाल करना, आदर करना, सोचना,
अभि–
अंकित करना, देखना,
आ–
देखना, प्रत्यक्ष करना, अवलोकन करना– आलक्ष्य दन्तमुकुलान् –श० ७।१७, नातिपर्याप्तमालक्ष्य मत्कुक्षेरद्य भोजनम्–रघु० १५।१८,
उप–
1. देखना, अवलोकन करना, निगाह डालना, अंकित करना, –सम्यगुपलक्षितं भवत्या –श० ३
2. अंकित करना, चिह्न लगाना –याज्ञ० १।३०, २।१५१
3. प्रकट करना, मनोनीत करना
4. अतिरिक्त उपलक्षित होना, वस्तुतः अभिव्यक्त की अपेक्षा अधिक सम्मिलित करना–नक्षत्रशब्देन ज्योतिःशास्त्रमुपलक्ष्यते –मनु० ३।१६२ पर कुल्लू०
5. मनन करना, विचारकोटि में लाना
6. खयाल करना, मानना,
वि–
1. अवलोकन करना, ध्यान देना, देखना
2. चरित्रचित्रण करना, अन्तर प्रकट करना
3. व्याकुल होना, चकित होना, घबरा जाना–निर्व्यापारविलक्षितानि सान्त्वय बलानि –उत्तर० ६,
सम्–
1. अवलोकन करना, प्रत्यक्ष करना, देखना, ध्यान देना –आश्चर्यदर्शनः संलक्ष्यते मनुष्यलोकः, –श० ७, संलक्ष्यते न छिदुरोऽपि हार:– रघु०१६।९२, 'ध्यान नहीं दिया जाता या ज्ञात नहीं होता' ८।४२
2. परीक्षण करना, सिद्ध करना, निर्धारित करना –हेम्नः संलक्ष्यते ह्यग्नौ विशुद्धिः श्यामिकाऽपि वा –रघु० १।१०
3. सुनना, जानना, समझना ४. चरित्रचित्रण करना, भेद बताना ।



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