लिह् (अदा० उभ० लेढि, लीढे, लीढ, इच्छा० लिलिक्षति –ते)
1. चाटना –कपाले मार्जारः पय इति कराँल्लेढि शशिनः –काव्य० १९, भामि० १।१९, कि० ५।३८, शि० १।४०
2. चाट जाना, चखना, घूंट–घूंट से पीना, लप–लप करके पीना –नै० २।९९, १००,
अव–
1. चाटना, लपलप करके पीना, थोड़ा थोड़ा करके चखना –भवव्यालावलीढात्मनः– गंगा० ५०, वेणी० ३।५, भामि० १।१११
2. चबाना, खाना –दभैरर्धावलीढैः –श० १।७, मृच्छ० १।९,
आ–
1. चाटना, लपलप करके पीना
2. घायल करना, आघात पहुँचाना –सेनान्यमालीढमिवासुरास्त्रैः–रघु० २।३७
3. (आँखों से) ग्रहण करना, देखना,–न याम्यामालीढा परमरमणीया तव तनुः–गंगा० ३२,
उद्–
चमकाना, घर्षण द्वारा चिकना बनाना, रगड़ना –मणिः शाणोल्लीढ:–भर्तृ० २।४४,
परि–, सम्–
चाटना– भट्टि० १३।४२ ।